राम लाल री राम राम जी,

Showing posts with label ब्लाग. Show all posts
Showing posts with label ब्लाग. Show all posts

Sunday, April 18, 2010

आपकी पोस्ट पर लानत भेजता हूं

कई ब्लाग पोस्ट पढ़कर दिल तो करता है कि टिप्पणी दूं - "आपकी पोस्ट पर लानत भेजता हूं"...पर समाजकर्म है कि कुछ कहते नहीं बनता. कम से कम कविताओं के ढेरों ब्लागों की तो यही हालत है. एक से एक फुसफुसी तुकबंदियां...(हालांकि कविताओं के भी कुछ ब्लाग बहुत बेहतरीन हैं)

और उस पर तुर्रा ये कि अगर महिला कवियत्री हुई तब तो टिप्पणियों की बाढ़ सी ही आ जाती है. अरे भई बुरा नहीं कह सकते तो अच्छा तो मत बताओ. अभी नया-नया हूं इस दुनिया में...शायद मैं भी समझ जाउं धीरे-धीरे...
0----------------0

Wednesday, March 10, 2010

ब्लाग लिख कर तीर मारने वालों की फ़ेहरिस्त

उस दिन मैं बात कर रहा था - " भई राम लाल, ये ब्लाग लिखने की क्या सूझी ?"

राम लाल -"अरे भाई, जब ये लेखक टाइप लोग कुछ कुछ लिख कर इस मुग़ालते में रहते हैं कि उनके लिखे से समाज बदल जाएगा तो फिर मैं क्यों पीछे रहूं !"

-"तो ?" 

-"तो क्या, मैंने भी ठान ली कि मैं भी रहे-सहे समाज को हिन्दी ब्लाग लिख कर बदल डालूंगा, और साथ ही साथ बैठे-ठाले हिन्दी की सेवा भी हो जाएगी."

-"हें हें हें"

-"हें हें हें क्या कर रहे हो, यही सच्चाई है. न मानो तो किसी से भी पूछ लो."
0------------------0

Sunday, March 7, 2010

आलोक मेहता को एक चपत राम लाल की भी.

कोई आलोक मेहता किसी अख़बार में ब्लागरों के बारे में कुछ उल्टा-सीधा लिख कर होली मना चलता बना. 

बाद में पता कि हिन्दी ब्लागरों से पंगा लेने वाले ये सज्जन आजकल राजनीति के गलियारों में संसद-सदस्यता सूंघते घूम रहे हैं. ये पत्रकार टाइप कुछ हैं; यहां-जुगाड़ बिठाने में काबिल हैं और अब संपादकी कर रहे हैं. और अभी भी इसी मुग़ालते में घुले जा रहे हैं कि संपादक आज भी बहुत बड़ी तोप होता है जो लेखकों को लतिया सकता है :-)

कई ब्लागर आते-जाते ब्लाग-पोस्ट लिख एक चपत लगा चले आ रहे हैं इसलिए, एक मेरी भी सही.
0-----0

About Me

My photo
रेडि‍यो टीवी से दुनि‍या का पता चलता रहता है. कभी कभी अख़बार मि‍ल जाता है तो वो भी पढ़ लेता हूं.