कई ब्लाग पोस्ट पढ़कर दिल तो करता है कि टिप्पणी दूं - "आपकी पोस्ट पर लानत भेजता हूं"...पर समाजकर्म है कि कुछ कहते नहीं बनता. कम से कम कविताओं के ढेरों ब्लागों की तो यही हालत है. एक से एक फुसफुसी तुकबंदियां...(हालांकि कविताओं के भी कुछ ब्लाग बहुत बेहतरीन हैं)
और उस पर तुर्रा ये कि अगर महिला कवियत्री हुई तब तो टिप्पणियों की बाढ़ सी ही आ जाती है. अरे भई बुरा नहीं कह सकते तो अच्छा तो मत बताओ. अभी नया-नया हूं इस दुनिया में...शायद मैं भी समझ जाउं धीरे-धीरे...