किसी टी.वी. चैनल पर देखा कि एक मुस्लिम महिला का कहना था कि यदि मोहम्मद साहब की तस्वीर बना कर छीछालेदर की कोशिश की भी गई है तो इसे सिरे से नकार देना भर ही काफी है, नाहक तूल क्यों देना, पर पाकिस्तान ने फ़ेसबुक साइट बैन कर दी. फिर लगा कि लोहा गर्म है...सो लगे हाथ यूट्यूब साइट भी बंद कर दी. फिर याद आया कि अरे! ट्विट्टर साइट तो रह ही गई...इसलिए सरकार शाम होते न होते वह फिर लौट के आई और इस पर भी ताला ठोक, दांत फाड़ते हुए चलते बनी.
इधर, भारत में तमाम हिन्दू देवी-देवताओं की तो एक ज़माने से बाक़ायदा फ़िल्में बनती रही हैं. नारद मुनि जैसे देवताओं को तो लोग कामेडियन के ही रूप में देखने के आदि हो गए हैं. दोनों समाज कितना अलग सोचते हैं. अच्छा लगता है यह पाकर कि हम सोचने और बोलने के लिए आज़ाद है....और हां, हमारे यहां इस तरह की वेबसाइट्स बैन करने का रिवाज़ भी नहीं है.