टाइम्स आफ़ इंडिया, नई दिल्ली, 30 जून, 2010
राम लाल री राम राम जी,
Showing posts with label महिला. Show all posts
Showing posts with label महिला. Show all posts
Wednesday, June 30, 2010
Thursday, March 25, 2010
एम.पी. को देख सीटी बजाने के दिन आए
मुलायम सिंह यादव का मानना है कि महिला आरक्षण इस लिए नहीं होना चाहिये कि महिला सांसदों को देखकर छोरे सीटियां बजाएंगे.
लेकिन ऐसी महिलाओं को बिना सांसद बने ही, कोई देख सीटी बजाए तो शायद इन्हें कोई एतराज़ नहीं है. साथ ही, बिना आरक्षण के जीत कर आने वाली महिलाओं पर कोई सीटी नहीं बजाएगा, इस बात की भी गांरटी है.
सीटीयां बजाने वाली प्रजाति को प्रणाम. भई ऐसी सोच वाले लोग किन कारखानों में बनाए जाते हैं, पता नहीं...
लेकिन ऐसी महिलाओं को बिना सांसद बने ही, कोई देख सीटी बजाए तो शायद इन्हें कोई एतराज़ नहीं है. साथ ही, बिना आरक्षण के जीत कर आने वाली महिलाओं पर कोई सीटी नहीं बजाएगा, इस बात की भी गांरटी है.
सीटीयां बजाने वाली प्रजाति को प्रणाम. भई ऐसी सोच वाले लोग किन कारखानों में बनाए जाते हैं, पता नहीं...
0-------0
Saturday, March 20, 2010
लाठीधारी स्त्रिवादियों को भी जै राम जी की.
मुझे लगा कि घुघूती बासूती के ब्लाग पर की गई इस टिप्पणी को यहां पोस्ट की तरह लगाया जाना चाहिये:-
इस चश्में को उतार फेंक यह देखने की ज़रूरत है कि सिक्के के कई पहलू और भी हैं...क्या कभी यह जानने की कोशिश की है इन्होंने कि पश्चिमी-समाज में स्त्री की भारत सरीखी तथाकथित दोयम स्थिति न होने के बावजूद वहां भी स्त्रियां वे काम करती हैं जिन्हें यहां महिलाओं की तथाकथित आज़ादी पर हमला माना जाता है. ठीक उसी तरह के काम वहां के पुरूष भी करते हैं जिन्हें यहां स्त्रिवादी जीव सामाजिक विकृति माने बैठे हैं.
कुछ लोगों के दिमाग़ में यह अच्छे से बैठ गया है कि पुरूष केवल स्त्री का शोषक व केवल शोषक ही हो सकता है (कारण :- हो सकता है उनके घरों में या उनके आस पास ऐसा होता आया हो). ऐसे में उनकी आंखों पर एक ही मायोपिक चश्मा रहता है जिससे उन्हें यह बिल्कुल नहीं दिखता कि स्त्री व पुरूष एक दूसरे के पूरक भी हो सकते है (क्या है मन:स्थिति रूग्णता नहीं है?).
नवजात को स्तनपान कराना यदि स्त्री ममत्व भी परिलक्षित करता हो तो यह क्रिया पुरूष की गुलामी की द्योतक है क्या ! वहीं, सड़क पर सीटी बजाना या हाथ उठाने की हिमाकत को औचित्यपूर्ण विकृत मस्तिष्क ही ठहरा सकता है...
... one up man-ship के बजाय ज़रूरी है कि समाज के दोनों अंग ठंडे दिमाग़ से काम लें और posturing बंद करें.
0---------0
Saturday, March 13, 2010
वाह भई कल्बे छा गए तुम तो
लखनऊ के एक कोई तथाकथित काले चोगे वाले शिया लीडर कह रहे हैं कि महिलाओं का काम सिर्फ़ बच्चे पैदा करना है न कि अपना हिस्सा मांगना. इन सज्जन का नाम है कल्बे जव्वाद. कल किसी दूसरे टी.वी. चैनल पर एक साधूबाबा भी कुछ यही राग अलाप रहे थे.
इन प्रस्तरयुगीन विचारधारा वाले लोगों का कब उद्धार करोगे प्रभो ! इन्हें ज़्यादा नहीं तो कम ही सही, मगर कुछ बुद्धी तो दे ही दो.
लोग तो जानवरों को भी प्यार से संबोधित करते हैं, कल्बे जी.
इन प्रस्तरयुगीन विचारधारा वाले लोगों का कब उद्धार करोगे प्रभो ! इन्हें ज़्यादा नहीं तो कम ही सही, मगर कुछ बुद्धी तो दे ही दो.
लोग तो जानवरों को भी प्यार से संबोधित करते हैं, कल्बे जी.
0------0
Tuesday, March 9, 2010
महिला आरक्षण विधेयक की सबसे बड़ी ग़लती.
सोचना तो सरकार को भी चाहिये कि जब, संसद व राज्यों में पहले से ही अनुसूचित जाति/जनजाति के लिए आरक्षण है तो क्यों नहीं जनप्रतिनिधियों की समस्त संख्या में से महिला आरक्षण दिया जाता.
या कहिये कि कुल सीटें 100, अनुसूचित जाति/जनजाति के लिए 23, बाक़ी बची 77, तो 77 में से 33% का आरक्षण क्यों !
क्यों नहीं 100 में 50% आरक्षण दे देते महिलाओं को. जाति-आरक्षित सीटें तो पहले ही चिन्हित हैं, 100 में से भी एक अनुपात में तय कर दें कि कौन कौन सी सीटें केवल महिलाओं के लिए रहेंगी. इससे मुलायमों/ लालुओं का अफ़ारा भी ठीक हो जाएगा, सदनों में महिलाएं भी प्रयाप्त संख्या में आ पाएंगी.
पर बिल्ली के गले घंटी बांधे कौन ? न सोनिया गांधी मेरा ब्लाग पढ़ती है न मनमोहन सिंह, और जो, मुझ सरीखे, पढ़ते भी हैं उनकी बेचारे मुलायमों/ लालुओं जितनी ही चलती है :-)
0-------0
Saturday, March 6, 2010
ये कैसा आरक्षण है जी ?
सुना है कि सारी गोटियां फिट करके सरकार महिला आरक्षण विधेयक ला रही है सोमवार को.
चमड़े के डिजा़यनर झोले लिए चमचमाती कारों में घूमती, बड़ी बिंदियों वाली भैनजियों की चांदी कटने वाली है.
खूब खबर है ये खूंटा बदल भी.
शोषण खाली-पीली मर्द ही काहे करें जी !
चमड़े के डिजा़यनर झोले लिए चमचमाती कारों में घूमती, बड़ी बिंदियों वाली भैनजियों की चांदी कटने वाली है.
खूब खबर है ये खूंटा बदल भी.
शोषण खाली-पीली मर्द ही काहे करें जी !
Subscribe to:
Posts (Atom)
About Me
- राम लाल
- रेडियो टीवी से दुनिया का पता चलता रहता है. कभी कभी अख़बार मिल जाता है तो वो भी पढ़ लेता हूं.
