राम लाल री राम राम जी,

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Wednesday, October 20, 2010

कसाब को आज़ाद कर दो


सउदी अरब के एक बिगड़े नवाबज़ादे ने 15 फ़रवरी को इंग्लैण्ड में अपने नौकर की हत्या कर दी और न्यायालय ने आज उसे उम्रक़ैद, जिसमें कम से कम 20 वर्ष की जेल तय, की सज़ा सुना दी. यह शख़्स साउद अब्दुलअज़ीज़ बिन नासेर अल साउद है जो कि साउदी अरब के सुल्तान अबदुल्ला के भाई का पोता है.

एक हम है कि आज पूरे दो साल बाद भी डेढ़ कौड़ी के कसाब से न्यायालयों के कैमरों पर थुकवाते घूम रहे हैं. इसमें सबसे मज़े की बात ये है कि हमारा क़ानून उन्हीं अंग्रेज़ों का बनाया हुआ है जो 9 महीने में न्याय करके परे मारता है और इस बात की चिंता तक नहीं करता कि साउदी अरब इंग्लैण्ड का "आतंक के विरूद्ध दोस्त" है या, अब उसे तेल मिलेगा कि नहीं.

इधर हम हैं कि पता नहीं पाकिस्तान से किस तेल की उम्मीद में एक सामूहिक नरसंहारी को टुकड़े डाले चले जा रहे हैं. अरे भई अगर फ़ैसला नहीं कर पा रहे तो इसे आज़ाद कर दो (लोग अपने आप देख लेंगे).
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Friday, May 21, 2010

वाह रे पाकिस्तान तेरी ट्विट्टरी की क्या कहने

किसी टी.वी. चैनल पर देखा कि एक मुस्लिम महिला का कहना था कि यदि मोहम्मद साहब की तस्वीर बना कर छीछालेदर की कोशिश की भी गई है तो इसे सिरे से नकार देना भर ही काफी है, नाहक तूल क्यों देना, पर पाकिस्तान ने फ़ेसबुक साइट बैन कर दी. फिर लगा कि लोहा गर्म है...सो लगे हाथ यूट्यूब साइट भी बंद कर दी. फिर याद आया कि अरे! ट्विट्टर साइट तो रह ही गई...इसलिए सरकार शाम होते न होते वह फिर लौट के आई और इस पर भी ताला ठोक, दांत फाड़ते हुए चलते बनी.

इधर, भारत में तमाम हिन्दू देवी-देवताओं की तो एक ज़माने से बाक़ायदा फ़िल्में बनती रही हैं. नारद मुनि जैसे देवताओं को तो लोग कामेडियन के ही रूप में देखने के आदि हो गए हैं. दोनों समाज कितना अलग सोचते हैं. अच्छा लगता है यह पाकर कि हम सोचने और बोलने के लिए आज़ाद है....और हां, हमारे यहां इस तरह की वेबसाइट्स बैन करने का रिवाज़ भी नहीं है.

Friday, March 12, 2010

श्श्श्श्श...पाकिस्तान का मज़ाक उड़ाना मना है.

कल तक, पाकिस्तान के पास ले दे कर दो ही चीजें थीं जिनके भरोसे ये गंजे बच्चों की मानिंद उछल-उछल कर दुनिया को अपना बचकाना सा मुंह दिखाता आया है. पहला है परमाणु बम्ब व दूसरे, हाकी-क्रिकेट का खेल.


क्रिकेटरों को कल इसने हड़का के बर्ख़ास्त कर दिया, आज हाकी की पूरी टीम ने डर के मारे ख़ुद ही स्तीफ़ा दे दिया. परमाणु बम्ब पर अमरीकी मरीन  पहले ही कुंडली मारे बैठे हैं. अब पाकिस्तान के पास बचा क्या !


ऐसे में सबसे बढ़िया एक बात जो इतिहास सिखाता आया है वह आज भी वैध है. कल तुर्की साम्राज्य से बचाव के लिए अंग्रेज़ों ने अफ़ग़ानिस्तान को बफ़र बना रखा था आज तालिबानियों के भारत में उत्पात से बचने के लिए हमें पाकिस्तान की सख़्त ज़रूरत है. 


IPL  वालों को चाहिये कि, राष्ट्रहित में, इसी के चलते पाक क्रिकेटरों को कुछ पैसे दे कर खिला लें. पाकिस्तान को, अमेरिका के अलावा भी चार पैसे की मदद हो जाएगी.
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