समाचार को पढ़ने के लिए इस पर क्लिक करें
सूखा पड़ता है तो हम लाओ-लाओ चिल्लाते हैं, बाढ़ आती है तो बचाओ-बचाओ. लेकिन हम सीखने से तब तक इन्कार करते रहते हैं जब तक कोई और चारा ही न बचे. अब ऊपर के समाचार को ही देख लीजिए, देश में हर जगह पानी का कमोवेश यही हाल है पर हम Rain Water Harvesting से आंखें चुराए बैठे हैं....नि:संदेह हम डंडे की इंताज़ार में हैं.
0-----0
