76 पुलिस वालों को यूं घेर कर मार डालने के बावजूद क्या सरकार को ये लगता है कि नक्सलियों को हराने के लिये उसके पास कोई नीति है ? या यूं ही गाल बजाने से काम चलाते रहेंगी सरकारें !
सरकारों को याद रखना चाहिये कि पुलिस में केवल रोटी की चाह में भर्ती होने वालों की संख्या घट रही है. अब सिपाही भी खाते पीते घरों से आते हैं और वे यूं गुफाकाल के हथियारों और सुविधाओं के साथ जीने को तैयार नहीं हैं. चेतने का समय निकलने नहीं देना चाहिये.
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