राम लाल री राम राम जी,

Friday, May 21, 2010

वाह रे पाकिस्तान तेरी ट्विट्टरी की क्या कहने

किसी टी.वी. चैनल पर देखा कि एक मुस्लिम महिला का कहना था कि यदि मोहम्मद साहब की तस्वीर बना कर छीछालेदर की कोशिश की भी गई है तो इसे सिरे से नकार देना भर ही काफी है, नाहक तूल क्यों देना, पर पाकिस्तान ने फ़ेसबुक साइट बैन कर दी. फिर लगा कि लोहा गर्म है...सो लगे हाथ यूट्यूब साइट भी बंद कर दी. फिर याद आया कि अरे! ट्विट्टर साइट तो रह ही गई...इसलिए सरकार शाम होते न होते वह फिर लौट के आई और इस पर भी ताला ठोक, दांत फाड़ते हुए चलते बनी.

इधर, भारत में तमाम हिन्दू देवी-देवताओं की तो एक ज़माने से बाक़ायदा फ़िल्में बनती रही हैं. नारद मुनि जैसे देवताओं को तो लोग कामेडियन के ही रूप में देखने के आदि हो गए हैं. दोनों समाज कितना अलग सोचते हैं. अच्छा लगता है यह पाकर कि हम सोचने और बोलने के लिए आज़ाद है....और हां, हमारे यहां इस तरह की वेबसाइट्स बैन करने का रिवाज़ भी नहीं है.

5 comments:

  1. bahut khoob, bas ek baat maafi ke saath jodana chahunga ki humare desh men to aise log bhee hain jo hindu diviyon ke nagn chitra banane walon ke samarthan men bolate hain. aise logon ke karan hee secular word galee lagata hai

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  2. जो ट्रेंड चल रहे हैं उनमें हम भी बहुत दूर नहीं हैं. सलमान रश्दी की किताब पर प्रतिबन्ध लगाने वालों में हम पहले थे. तसलीमा नसरीन के हिंसक विरोध को भी हम रोक नहीं सके.

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  3. भाई अनुराग जी, ग़लत तो ग़लत ही है फिर वह कहीं भी क्यों न हो. ग़लत को भारत के संदर्भ में भी ठीक नहीं ठहराया जा सकता. फ़र्क़ बस इतना है कि जो भारत में अपवाद हो सकता वह पाकिस्तान में राज्यनीति हो सकती है.

    और, ब्लाग से जुड़ने के लिए आपका आभार.

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  4. अभिव्यक्ति के माध्यम पर अंकुश लगा कर विचार को नहीं दबाया जा सकता.

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  5. Hindu devi devataaon ke saath jo karanaa hai karen... poori chhut hai. :-((

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रेडि‍यो टीवी से दुनि‍या का पता चलता रहता है. कभी कभी अख़बार मि‍ल जाता है तो वो भी पढ़ लेता हूं.