ऊपर वाले चित्र में:- एक पार्क के बाहर, सुबह की सैर को आने वाले लोगों के लिए एक आदमी मिल्क शेक बेच रहा है. मिल्क शेक की मिक्सी पोर्टेबल जैनरेटर से चलाता है वह.
नीचे वाले चित्र में:- उसी मिल्क शेक वाले के सामने सड़क के पार, लोकल मार्केट के बाहर एक स्थाई बोर्ड लगा है जिस पर लिखा है "शिव भंडारा, हर सोमवार दोपहर 1 से 2.30"...
शहरी मध्यवर्ग के बारे में सोचता हूं कि आजकल, ये कुछ ठीक-ठाक ही नहीं कमा रहा (?) कि जहां एक ओर अब यह इतना मंहगा मिल्क शेक पी लेता है वहीं दूसरी ओर, यह इतना मंहगा सामान भी ख़रीद लेता है कि इसे की गई बिक्री के मुनाफ़े में से दुकानदार अब लंगर भी चला लेते हैं...!!!
क्या कहना चाह रहे हैं -पता नहीं क्यूँ स्पष्ट नहीं हो पाया. फिर से आता हूँ.
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