राम लाल री राम राम जी,

Wednesday, March 17, 2010

कितने बदनसीब हैं ये लोग

कुछ लोग हैं 
कि जिन्हें पता नहीं
खुशियों का मतलब.

और कुछ हैं कि 
खुशियों से मुंह चुराए बैठे हैं.

ज़रूर बदनसीब रहे होंगे
ये लोग.
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3 comments:

  1. सही है...


    मतलत...मतलब!

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  2. समीर जी, ग़लती की ओर ध्यान दिलाने के लिए बहुत बहुत धन्यवाद, क्षमाप्रार्थना सहित. भूल सुधार ली गई है :)

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रेडि‍यो टीवी से दुनि‍या का पता चलता रहता है. कभी कभी अख़बार मि‍ल जाता है तो वो भी पढ़ लेता हूं.