राम लाल री राम राम जी,

Wednesday, March 10, 2010

काहे ब्याही बिदेस लखी

न जाने कौन सा भ्रम है कि फूलों सी पालने के बाद भी मां-बाप अपनी बेटियों को विदेश ब्याह देते हैं. 

इतनी ख़बरें रोज़ आती हैं कि इन बेटियों को विदेशों में जाने क्या-क्या सहना पड़ता है और मां-बाप हैं कि चाह कर भी अपने कलेजे के टुकड़े के लिए कुछ नहीं कर पाते. 

सरकारों और कानूनों के सहारे रिश्ते भी चला करते हैं क्या !

भौतिकता व कथित समाजिक सम्मान पर ममता कब पार पाएगी  ?
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3 comments:

  1. सही बात है। धन्यवाद।

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  2. "सरकारों और कानूनों के सहारे रिश्ते भी चला करते हैं क्या !"

    bilkil sahi, inke liye jo vishvaash ki jameen chaahiye wo apne desh me bhi(hi)mil skti hai.
    kunwarji,

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  3. शुक्रिया ,
    देर से आने के लिए माज़रत चाहती हूँ ,
    उम्दा पोस्ट .
    aapki sabhi post acchi hain.

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रेडि‍यो टीवी से दुनि‍या का पता चलता रहता है. कभी कभी अख़बार मि‍ल जाता है तो वो भी पढ़ लेता हूं.